LAXMI VILAS RASA (ABHRAK) लक्ष्मीविलास रस (अभ्रक)

 कुष्ठ ,प्रमेह,नासूर,दुष्टव्रण ,गुद रोग,भंगदर,कफ प्रधान श्लीपद,मेद्गत ,धातुगत,जीर्ण अथवा वंश परंपरागत गलशोथ ,अंत्रवृद्धि ,दारुण अतिसार,आमवात,उदररोग ,नासिका ,कर्ण ,नेत्र व मुख के विकार   ।

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घटक द्वव्य

अभ्रक भस्म ,शुद्ध पारद ,शुद्ध गंधक,कर्पूर ,जायफल,जावित्री ,विधारा के बीज ,धतूरे के बीज,गाँजे के बीज,विदारीकंद,शतवारी ,नागबला,अतिबला,गोखरू,जल बेंत  के बीज । 

भावना  द्रव्य  नागरबेल पान रस 
उपयोग

 कुष्ठ ,प्रमेह,नासूर,दुष्टव्रण ,गुद रोग,भंगदर,कफ प्रधान श्लीपद,मेद्गत ,धातुगत,जीर्ण अथवा वंश परंपरागत गलशोथ ,अंत्रवृद्धि ,दारुण अतिसार,आमवात,उदररोग ,नासिका ,कर्ण ,नेत्र व मुख के विकार   ।

मात्रा 125 मिलीग्राम से 250  मिली  ग्राम तक दिन  में दो बार  । 
अनुपान शहद

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