AMBER KASTURVADI VATI (अम्बर कस्तूरवादि वटी )

यह मष्तिस्क को बलप्रद,वातनाडियो व् संज्ञावाहनियो का उत्तेजक है। हृदयगति रोग तथा रक्तचाप हास में अति उदरवात, प्रमेह, कुष्ठ उपकारक है।

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घटक द्वव्य

अम्बर, स्वर्ण भस्म, पूर्णचन्द्रोदय, लौह भस्म (100 पुटी ),वांग भसम न 1. ,अभ्रक भस्म सहस्त्र पुटी ,मोती पिष्टी,रोप्या भस्म,माणिक्य पिष्टी,स्वर्ण वांग (चूर्ण ), पीपल 64 प्रहरी, केशर, शुद्ध कुचिला चूर्ण, जायफल चूर्ण, छोटी इलायची के दाने, भीमसेनी कर्पूर, लौंग चूर्ण,जावित्री चूर्ण ,अकरकरा ,चूर्ण।

 भावना द्वव्य 

केवड़ा जल 

सहायक द्रव्य स्वर्ण बंग 
उपयोग

यह मष्तिस्क को बलप्रद,वातनाडियो व् संज्ञावाहनियो का उत्तेजक है। हृदयगति रोग तथा रक्तचाप हास में अति उदरवात, प्रमेह, कुष्ठ उपकारक है।

मात्रा 60 मि. ग्रा. से 120 मि. ग्रा. दिन में 3 बार।
अनुपान खमीरा गावजवां या शहद या दूध ।

 

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