RAKTRODHAK VATI (रक्तरोधक वटी)

प्रवाल पिष्टी, रसौंत, गिलोय, स्वर्णमाक्षिक भस्म, बकायन पत्र, निम्ब पत्र, कर्पूर/स्वर्ण गैरिक ।

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 घटक द्वव्य 

प्रवाल पिष्टी, रसौंत, गिलोय, स्वर्णमाक्षिक भस्म, बकायन पत्र, निम्ब पत्र, कर्पूर/स्वर्ण गैरिक ।

भावना 

घृतकुमारी स्वरस

उपयोग रक्तपित , रक्त प्रदर ,रक्तार्श , आदि  रोगो में रक्त  स्राव को रोकने में उपयोफी है 
मात्रा 125 मि ग्राम  से 25० मि  ग्राम  दिन में २ बार 
अनुपान जल।

 

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