CHAVANPRASHAVALEHA -ASTHVARG (च्यवनप्राशावलेह ( अष्टवर्ग ))

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घटक द्वव्य

पाटला , अरणी, गम्भारी, बेल, श्योनाक, गोखरू
शालपर्णी, पृष्णपर्णी, छोटी कटेली, बड़ी कटेली, पीपल,काकड़ासिंगी , मुनक्का, गिलोय, हरड़ खरैटी, भूमि
आंवला, अड्सा, जीवन्ती, कचूर, नागरमोथा, पुष्करमूल,माषपर्णी, विदारीकन्द, साठी, इलायची, अगर, चंदन,जीवक, ऋषभक, मेदा, महामेदा, काकोली,क्षीर काकोली, ऋद्धि, वृद्धि, ताजा आंवला, गौघृत, तिल तैल,शक्कर, पीपल, वंशलोचन, दालचीनी, नागकेशर, तेजपत्ता,
कमल गट्टा, कौआ ठोडी, शर्करा ।

उपयोग

स्फूर्ति, शक्ति दायक, शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता
बढ़ाने हेतु विटामिन 'सी' से भरपूर है। वृद्धावस्था हेतु अमृत तुल्य, कफ नाशक, फेफड़े की कमजोरी, दुर्बलता,कब्जियत, मूत्राशय विकार, श्वास आदि दूर कर शरीर को हष्ट-पुष्ट करता है।

मात्रा 10 ग्रा. 20  ग्रा. तक दिन में 2 बार।
अनुपान दूध 

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