VYADHIHARAN RASA (व्याधिहरण रस )

शुद्ध पारद, शुद्ध गंधक, सोमल, हरताल, मैनसिल रसकर्पूर।

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घटक द्वव्य

शुद्ध पारद, शुद्ध गंधक, सोमल, हरताल, मैनसिल रसकर्पूर।

भावना द्वव्य घी कुंवार का रस।
उपयोग

फिरंग जनित रक्त विकार, संधिवात, कुष्ठ, नासात्रण  नाड़ीत्रण, विष हड्डी तक फैला हो तो थोड़े से दिनों में हो जाता है। 

मात्रा  60 मि. ग्रा. से 125 मि. ग्रा. चिकित्सक की सलाह से
अनुपान शहद या घी।

 

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