SAPTAMRIT LAUHA (सप्तामृत लौह)

 मधुयष्ठि, हरीतकी, विभीतकी, आमलकी समान भाग। लौह भस्म उपरोक्त सभी के बराबर

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घटक द्वव्य

 मधुयष्ठि, हरीतकी, विभीतकी, आमलकी समान भाग। लौह भस्म उपरोक्त सभी के बराबर

उपयोग

वमन ,तिमिर रोग ,अम्लपित्त ,परिणाम शूल ,आनाह ,नेत्ररोग , दृस्टि शक्ति वर्धक ,मूत्राघात में लाभकारी है 

मात्रा 1--1  ग्राम  दिन में 2 बार ।
अनुपान मधु या घृत 

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