PRAWALPANCHAMRUT (प्रवाल पंचामृत (द्वितीय विधि))

प्रवाल पिष्टी, शुक्ति पिष्टी, शंख भस्म, शुक्ति भस्म, वराटिका भस्म|

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घटक द्वव्य

प्रवाल पिष्टी, शुक्ति पिष्टी, शंख भस्म, शुक्ति भस्म, वराटिका भस्म|

भावना द्रव्य

गौ-दुग्ध।

उपयोग

बालशोष, कफ व आमज व्याधियाँ, हृदय रोग, प्लीहा, क्षय, मंदाग्रि, श्वास तथा अन्य विविध उदर, रोगों में ' लाभकारी है । निर्बल अस्थियों को शक्ति प्रदान करता है। यह उत्तम सुधा कल्प योग है । अश्मरी व मूत्र रोगों में उत्तम कार्य करता है।

मात्रा

1-3 गोली दिन में 2 बार।

अनुपान

शहद, शहद व पीपल, गुलकन्द या अनार रस

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