MAHAVISHGARBH TAIL (महाविषगर्भ तैल)

धतूरे के बीज, निर्गुण्डी के बीज, कडवी तुण्डी के बीज,पुनर्नवामूल, एरण्डी के बीज, असगंध, पुवाड़,चित्रकमूल, संहिजने की छाल, कांकमाची,कलिहारीमूल, नीम की अन्तर छाल, बकायन छाल,शतावर, छोटे करेले, सारिवा, गोरखमुण्डी, विदारीकन्द,सेहुण्ड, आक, मेड़ासिंगी, सफेद कनेर की मूल, पीलेकनेर की मूल, काकजंगा की मूल, अपामार्ग की मूल,बला, महा बला, छोटी कटेली, अडूसे के पत्ते, गिलोय,प्रसारणी, त्रिकटु, कुचिला, रास्त्रा, पंचलवण, नीलाथोथा,कायफल, पाठा, भारंगी, नौसादर, त्रायमाण, खार, जीरा,इन्द्रायण फल, काले तिल का तैल

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घटक द्वव्य

धतूरे के बीज, निर्गुण्डी के बीज, कडवी तुण्डी के बीज,पुनर्नवामूल, एरण्डी के बीज, असगंध, पुवाड़,चित्रकमूल, संहिजने की छाल, कांकमाची,कलिहारीमूल, नीम की अन्तर छाल, बकायन छाल,शतावर, छोटे करेले, सारिवा, गोरखमुण्डी, विदारीकन्द,सेहुण्ड, आक, मेड़ासिंगी, सफेद कनेर की मूल, पीलेकनेर की मूल, काकजंगा की मूल, अपामार्ग की मूल,बला, महा बला, छोटी कटेली, अडूसे के पत्ते, गिलोय,प्रसारणी, त्रिकटु, कुचिला, रास्त्रा, पंचलवण, नीलाथोथा,कायफल, पाठा, भारंगी, नौसादर, त्रायमाण, खार, जीरा,इन्द्रायण फल, काले तिल का तैल

सहायक द्रव्य

जल 

उपयोग

आम प्रकोप और शूलसहवातरोग, संधिवात, कटिवात,अर्धागवात, गृश्रसी, दण्डापतानकवातरोग, कर्णनाद, कानसे कम सुनना आदि दूर होते है।

मात्रा

 आवश्यकतानुसार ब्राह्य प्रयोजनार्थ।

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