CHANDRASHEKHER RASA (चन्द्रशेखर रस)

शुण्ठी, मरिच, पीपल, हरीतकी, विभीतकी, आमलकी, चव्य, धनियाँ, जीरक, सैंधव, शुद्ध पारद, शुद्ध गंधक, लौह भस्म, सुहागे का फूला।

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घटक द्वव्य

रस सिंदूर , अभ्रक भस्म, कांत लौह भस्म, मंडूर भस्म, गोरोचन, सुहागे का फूल।

भावना द्रव्य

 गोकर्णी का स्वरस  ।

उपयोग

यह रस यकृत आदि पाचन अवयवों को बल प्रदान करता है।  यह स्वसन संसथान व ह्रदय को उत्तेजित करता है।  इस रस के सेवन से बालको के मलावरोध , आम ज्वर , स्वप्नदोष से उत्त्पन सन्निपात , कास , श्वास , अजीर्ण , वामन , अतिसार, शूल , प्रतिश्याय , धनुर्वात व श्वसन ज्वर में लाभकारी है।

मात्रा

65 मि.ग्रा. से 150 मि. ग्रा. दिन में 2 बार।

अनुपान

माता का दूध या जल 

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