VISHAMJVARANTAK LOUHA-GOLD (विषमज्वरांतक लोहा -स्वर्ण )

रस पर्पटी, लौह भस्म, ताम्र भस्म, अभ्रक भस्म, वंग भस्म, प्रवाल भस्म, शंख भस्म, मुक्ता पिष्टी, मुक्ता शुक्ति भस्म, स्वर्ण भस्म, सुहागा पुष्प, सोनागेरु।

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घटक द्वव्य

रस पर्पटी, लौह भस्म, ताम्र भस्म, अभ्रक भस्म, वंग भस्म, प्रवाल भस्म, शंख भस्म, मुक्ता पिष्टी, मुक्ता शुक्ति भस्म, स्वर्ण भस्म, सुहागा पुष्प, सोनागेरु।

 भावना द्वव्य 

निर्गुण्डी पत्र रस, धतूर पत्र रस, काल मेघ रस ।

उपयोग

इसका उपयोग जीर्ण ज्वर, यकृत, प्लीहावृद्धि, ज्वर, राजयक्ष्मा, पाण्डु, प्रमेह, कास, श्वास, आमदोष, ग्रहणी में होता है।

मात्रा 100 मि. ग्रा. से 200 मि. ग्रा.
अनुपान शहद।

 

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