Kalera-bhawan


भवन का संक्षिप्त परिचय

ग्राम कालेड़ा, तहसील-केकड़ी, जिला अजमेर (राज. ) में एक छोटा सा ग्राम है जो डा बस मार्ग पर केकड़ी से 10 कि.मी. दक्षिण में, अजमेर से 90 कि.मी. एवं जयपुर से 146 कि.मी. दूर स्थित है। कालड़ा
ग्राम जिला- अजमेर के इस्तमरारदार स्वर्गीय श्री युत्त ठाकुर नाथूसिंह जी एक सेवाभावी महानुभाव थे। होम्योपैथी औषधियों से ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धन जनता की यथा शक्ति सेवारत्‌ रहते थे। श्रद्धेय श्री स्वामी कृष्णानन्द जी महाराज
से 1930 में ठाकर साहब का सम्पर्क होने पर वे उन्हें सम्मान के साथ ग्राम कालेड़ा ले आये। स्वामीजी के मार्गदर्शन में आयुर्वेदिक औषधियों का निर्माण आवश्यकतानुसार प्रारम्भ हुआ और तब होम्योपैथी के बजाय आयुर्वेदिक
औषधियों के माध्यम से रूगणों की चिकित्सा सेवा प्रारम्भ की गई। पवित्र सेवा के विस्तार का लक्ष्य रखकर '“ कृष्ण गोपाल आयुर्वेदिक धममार्थ औषधालय '' की स्थापना ब्रह्मलीन श्री स्वामीजी महाराज तथा स्व, श्रीमानू
ठाकुर नाथूसिंह जी द्वारा दृढ़ संकल्प पूर्वक अक्षय तृतीया 01.05.1930 को की गई।

ठाकुर साहब के पिताजी का नाम श्री गोपाल सिंह जी था। अतः श्री स्वामीजी के नाम से ' कुष्ण' और ठाकुर साहब के पिताजी के नाम से ' गोपाल नाम को मिलाकर ' कृष्ण गोपाल ' नाम को रचना हुई। कालान्तर में ग्राम भी ' कालेड़ा-कुष्ण गोपाल' नाम से प्रख्यात हुआ। सन्‌ 1945 में सर्वप्रथम कृष्ण गोपार्ल' के संयुक्त नाम से पूर्व गठित संस्था को ट्रस्ट (न्यास) का रूप दिया गया।

संस्था का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अंचल में चिकित्सा कार्य को आयुर्वेदिक पद्धति से विकसित करना रहा है। इसमें निर्धन जनता की निःशुल्क सेवा मुख्य है। इसी दृष्टि से सन्‌ 1945 में कालेड़ा-कृष्ण गोपाल ग्राम में. निर्मित कर साधन सम्पन्न आयुर्वेदिक चिकित्सालय की स्थापना की गई। इसमें बहिरंग चिकित्सा के अतिरिक्त अंतरंग चिकित्सा हेतु महिलाओं एवं पुरूषों के लिए पृथक-पृथक वार्ड का निर्माण किया। यहाँ प्रविष्ठ रोगियों के लिए औषध, पथ्य, भोजन, फल आदि की निःशुल्क व्यवस्था है। अंतरंग रोगियों की चिकित्सा के लिए औषधियाँ भी निःशुल्क दी जाती हैं। रोग निदान हेतु प्रयोगशाला द्वारा निःशुल्क परीक्षण किये जाते हैं। यहाँ भारत के सभी प्रान्तों से रोगी स्वास्थ्य लाभ के लिए आते हैं। अब तक लाखों रूगण स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर चुके हैं। कालेड़ा के अतिरिक्त वर्तमान में विभिन्न स्थानों पर 9 निःशुल्क औषधालय संचालित किये जा रहे हैं। चिकित्सा सेवा में कार्यरत संस्थाओं को भी औषधियों के रूप में निःशुल्क सहायता प्रदान की जाती है एवं ग्रामीण क्षेत्रों में निःशुल्क शिविर नियमित रूप से आयोजित किये जाते हैं।

स्वास्थ्य एवं चिकित्सा का कार्य अधिक से अधिक व्यापक हो सके एवं आयुर्वेद का प्रचार बढ़े, इस दृष्टि से भवन ने 353 आयुर्वेदिक औषधियों का पूर्ण शुद्धता व शास्त्रोक्त पद्धति से निर्माण करने के अतिरिक्त पूर्व
प्रकाशित 34 आयुर्वेदिक ग्रन्थों में से 21 ग्रन्थों का प्रकाशन निरन्तर किया है। जिसमें से कुछ ग्रन्थ तो ड्रग एवं कॉस्मेटिक एक्ट 1940 के शिड्यूल - 1 की सूची में सम्मिलित है। औषधियों का विक्रय मूल्य न्यून लाभ पर
विभिन्न क्षेत्रों में एजेन्टों के माध्यम से किया जाता है। औषधियों और पुस्तकों की बिक्री से प्राप्त राशि का उपयोग स्वास्थ्य एवं चिकित्सां सेवा कार्य हेतु किया जा रहा है। आयुर्वेदिक पुस्तकों के प्रकाशन के अतिरिक्त, वर्ष 1953 से आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार के लिए“स्वास्थ्य त्रैमासिक पत्रिका का प्रकाशन किया जा रहा है। इस पत्रिका की देश के विभिन्न प्रान्तों में काफी मांग है। स्वास्थ्य त्रैमासिक पत्रिका का वार्षिक मूल्य 100/- रू, है तथा पंच वार्षिक मूल्य 400/- रू, है।


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